फिट और एक्टिव रहने का आसान तरीका: फाइबर क्यों है जरूरी

कभी वर्क कभी फोटो शूट तो कभी मार्केटिंग कॉल पर आउटडोर जाना इनके काम में शुमार है। होटल की ब्रैंडिंग के लिए लोगों से मिलना और होटल में ही खाना इनके रुटीन में शामिल होता है। जी हां, होटल्स मार्क कॉम मैनेजर का प्रोफेशन ही कुछ ऐसा है कि इन्हें अपने लिए भी समय नहीं मिलता। ऐसे में यह अपनी सेहत और खानपान का खयाल कैसे रखते हैं, डीडी ने की पड़ताल। साथ ही इनकी लाइफस्टाइल को दुरुस्त करने के लिए डाइटीशियन से जानें कुछ खास टिप्स।

दिनचर्या: मेरे दिन की शुरुआत सुबह 7 बजे होती है। मुझे घर से होटल के लिए लगभग 8.30 बजे निकल जाना होता है। 7.30 से 8 के बीच मैं ब्रेकफस्ट करती हूं। सुबह का इतना बिजी शेड्यूल होता है कि कोई एक्सरसाइज या वर्कआउट तक नहीं कर पाती। मैं पिछले एक साल से इस जॉब में हूं। व्यस्तता के कारण वॉक नहीं कर पाती। सुबह भागमभाग रहती है।

ब्रेकफस्ट: मैं सुबह 7.45 बजे ब्रेकफस्ट करती हूं जिसमें आमतौर पर एक ग्लास दूध या चाय, कॉर्नफ्लेक्स, फ्रूट्स, ब्रेड बटर या फिर ऑमलेट होते हैं। इससे ज्यादा समय नहीं होता। मैं नॉनवेजटेरियन हूं। मैं होटल पहुंचने के बाद 9.30 तक ग्रीन टी लेती हूं। मन हुआ तो साथ में बिस्किट भी ले लेती हूं। 12.30 बजे तक कोई फल खाती हूं या ज्यादा भूख हो तो लंच जल्दी कर लेती हूं। मैं 2-3 घंटे के अंतर पर थोड़ा-थोड़ा कुछ न कुछ खाती रहती हूं।

लंच: आमतौर पर मैं लंच 1 बजे तक कर लेती हूं। होटल में ही खाती हूं, जिसमें दाल, चपाती, सब्जी और दही या सैलेड होते हैं।

स्नैक्स: शाम 4-5 बजे कभी कोल्ड कॉफी-बिस्किट या जूस या फिर सैंडविच लेती हूं। कोल्ड कॉफी पंद्रह दिन में एक बार लेती हूं। फिर घर पहुंचकर 7.00-7.30 बजे तक मेयोनीज चिकेन या हैम सैंडविच लेती हूं या फिर 1 ग्लास दूध लेती हूं। मैं सप्ताह में 2-3 दिन रात में या शाम को दूध लेती हूं।

डिनर: रात 10 बजे तक डिनर में दाल, रोटी, सब्जी और थोड़ा चावल लेती हूं। जब बाहर जाती हूं तो सिर्फ सैलेड, फ्रूट्स या सूप ही प्रेफर करती हूं। रात 12 बजे तक सो जाती हूं।

 

 

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Source : Agency

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