NEET री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर रोक जारी, दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को दी मंजूरी

नई दिल्ली

भारत में 22 जून तक टेलीग्राम पर बैन जारी रहेगा. दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम पर बैन लगाने के केंद्र सरकार के आदेश को सही ठहराया है. इसके साथ ही अदालत ने बैन के खिलाफ टेलीग्राम की याचिका खारिज कर दी. हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने बिना सोच-विचार किए यह आदेश जारी नहीं किया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले पर गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

एक दिन पहले हाई कोर्ट ने उठाया था सवाल
इससे पहले जस्टिस तेजस करिया की वेकेशन बेंच ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल इसलिए कि कुछ यूजर्स परीक्षा दे रहे हैं,मैसेजिंग ऐप के 15 करोड़ यूजर्स के अधिकारों को कैसे सीमित किया जा सकता है? नीट की परीक्षा से पहले ऐप के गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऐप पर कुछ दिनों के लिए रोक लगा दी थी। टेलीग्राम की ओर से अदालत में इसे चुनौती दी गई। अदालत ने गुरुवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

नीट पेपर के लिए लगाई गई रोक
नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को हुई थी। लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बीच 12 मई को इसे रद्द कर दिया गया। सीबीआई पेपर लीक की जांच कर रही है। 21 जून को दोबारा परीक्षा से पहले केंद्र सरकार ने कई तरह के कदम उठाए हैं। प्रश्नपत्रों को इस बार जहां एयर फोर्स के विमानों से भेजा गया है तो टेलीग्राम पर 22 जून तक के लिए अस्थायी रोक लगा दी गई। 3 मई वाली परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी में टेलीग्राम ऐप के इस्तेमाल का आरोप भी लगा है।

टेलीग्राम पर पहले भी लगते रहें आरोप
टेलीग्राम पर पहले भी कई बार पेपर लीक और फर्जी पेपर सर्कुलेट होने के आरोप लगते रहे हैं. यहां तक की कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा चुका है कि जालसाज और साइबर ठगी को अंजाद देने वाले भी इस प्लेटफॉर्म का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करते हैं। 

फैसले से पहले टेलीग्राम से बातचीत हो चुकी है
सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में बताया है कि टेलीग्राम को बुलाया गया था और उनकी बात सुनी गई. उनकी दलीलों और उस पर की गई जांच के निष्कर्ष रिकॉर्ड में दर्ज हैं. सरकार की तरफ से बताया जा चुका है कि इस मामले की सुनवाई एक कमेटी ने की थी, जिसकी अगुवाई कैबिनेट सचिव ने की है। 

टेलीग्राम के फीचर्स ही उसको बैन करने की वजह 
टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर ढेर सारे ऐसे फीचर्स हैं, जिसकी वजह से टेलिग्राम को अस्थाई प्रतिबंध का सामना करना पड़ रहा है. टेलीग्राम के एक ग्रुप में 2 लाख मेंबर्स तक को शामिल किया जा सकता है. ऐप पर हैवी फाइल्स को सेव किया जा सकता है. यहां बिना मोबाइल नंबर के भी अकाउंट बनाया जा सकता है। 

कई लोगों का सवाल सामने आया है कि टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों ही मैसेजिंग ऐप हैं. हालांकि प्राइवेसी के मामले में टेलीग्राम ऐप काफी आगे और अलग है. टेलीग्राम यूजरनेस बनाने की भी सुविधा देता है। 

केंद्र सरकार ने अदालत में क्या कहा था?
केंद्र सरकार ने दलील दी कि टेलीग्राम के दुरुपयोग किए जाने की पूरी आशंका है। केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि एक टेलीग्राम अकाउंट से 40 तक 'बॉट्स' बनाए जा सकते हैं। मेहता ने बताया कि रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल अक्सर आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है और इसकी संरचना की वजह से अलग-अलग इलाकों में कार्यरत कानून प्रवर्तन एजेंसियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मेहता ने कहा, 'फेसबुक या व्हाट्सऐप जैसे दूसरे प्लेटफॉर्म के साथ यह समस्या नहीं होती है। यह प्लैटफॉर्म 'क्लाउड' के जरिए काम करता है, इसलिए अगर हम किसी चीज को ब्लॉक भी कर दें और कोई गड़बड़ी करे, तो भी कानून प्रवर्तन एजेंसी उस व्यक्ति तक नहीं पहुंच सकती।'

 

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Source : Agency

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