नई शिक्षा व्यवस्था से विद्यार्थियों में बढ़ेगा कौशल और ज्ञान का दायरा : एसीएस राजन

भोपाल

शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय, भोपाल द्वारा “विकसित भारत @ 2047: संस्कृति, ज्ञान तथा सततता पर अन्तर्विषयी दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसका शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने शुभारंभ किया। साथ ही महाविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी को लेकर तैयार की गई स्मारिका एवं मोनोग्राफ का लोकार्पण भी किया।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  राजन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा व्यवस्था में बहुविषयक अध्ययन पद्धति को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बहु-विषयक ज्ञान प्रदान करना है। एसीएस  राजन ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समग्र विकास की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के संतुलित और समग्र विकास के लिए मानव मूल्यों, संस्कृति, विरासत और पर्यावरण के संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विज्ञान का अध्ययन महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ कला और सामाजिक विषयों से भी जुड़ाव उतना ही आवश्यक है, जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो सके।

शोध-पत्र प्रस्तुत किये जायेंगे

संगोष्ठी के दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। साथ ही विकसित भारत 2047 की संकल्पना के संदर्भ में संस्कृति, ज्ञान परंपरा और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श भी किया जा रहा है।

 राजन ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन

अपर मुख्य सचिव  राजन ने दो दिसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में महाविद्यालय परिसर में विभिन्न संकायों द्वारा लगाई गए एक विशेष अन्तर्विषयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने छात्राओं से संवाद कर प्रदर्शनी के बारे में जानकारी भी प्राप्त की। इसके साथ ही प्राचीन सिक्कों का संग्रह, सम्राट विक्रमादित्य के सिक्के, उज्जैन के महाकाल मंदिर से संबंधित सिक्के तथा अन्य कालखंडों के दुर्लभ सिक्कों का प्रदर्शन भी किया गया। इसके अतिरिक्त पद्म डॉ. नारायण व्यास द्वारा संग्रहित प्राचीन औजार, पंचांग, डाक टिकट तथा अन्य पुरावस्तुओं का भी प्रदर्शन किया गया। महाविद्यालय द्वारा स्वराज संस्थान, भोपाल के सहयोग से “वंदे मातरम्” की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की उत्पत्ति, स्वतंत्रता संग्राम में उसकी प्रेरक भूमिका तथा भारतीय राष्ट्रीय चेतना में उसके महत्व को भी प्रदर्शित किया गया।

संगोष्ठी में आयुक्त, मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग  मनोज वास्तव, आयुक्त, उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, नई दिल्ली  आर.आर. रश्मि, पद्म डॉ. नारायण व्यास, साहित्यकार  उदयन वाजपेई, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के डॉ. मनोज कुमार कुर्मी, जनजातीय संग्रहालय, भोपाल के निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे तथा दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के निदेशक डॉ. मुकेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में विद्वान एवं महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं।

 

 

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Source : Agency

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