पानीपुरी बेचने वाले कुछ विक्रेताओं को जीएसटी विभाग से नोटिस मिलने का दावा किया गया, सोशल मीडिया पर खबर वायरल

नई दिल्ली
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाली खबर वायरल हो रही है, जिसमें पानीपुरी बेचने वाले कुछ विक्रेताओं को जीएसटी विभाग से नोटिस मिलने का दावा किया गया है। कारण? ऑनलाइन भुगतान प्लेटफॉर्म जैसे RazorPay और PhonePe के जरिए उनके लेन-देन 40 लाख रुपये से अधिक हो गए हैं। यह खबर जितनी हैरान करने वाली है, उससे ज्यादा मजेदार प्रतिक्रियाओं के कारण सुर्खियां बटोर रही है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मुद्दे को हल्के-फुल्के अंदाज में लिया। एक यूजर ने लिखा, "अब समय आ गया है कि वह अपने ब्रांड का नाम 'PP Waterballs' रखकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम रखें।" वहीं, एक और ने मजाक करते हुए कहा, "पानीपुरी का लंदन में निर्यात करने का बेहतरीन मौका है।"

सड़क विक्रेता और जीएसटी
आमतौर पर, भारत में छोटे सड़क विक्रेता जीएसटी या आयकर के दायरे में नहीं आते क्योंकि उनकी आय सीमित होती है। जीएसटी पंजीकरण केवल उन कारोबारियों के लिए जरूरी है जिनका वार्षिक टर्नओवर 40 लाख रुपये से अधिक हो। इसी तरह, आयकर उन्हीं पर लागू होता है जिनकी आय 2.5 लाख रुपये सालाना से ज्यादा हो।

डिजिटल लेन-देन से बढ़ा प्रभाव
आजकल ग्राहक ऑनलाइन भुगतान करना ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे इन विक्रेताओं की कुल लेन-देन राशि बढ़ रही है। यह बदलाव छोटे व्यवसायों को टैक्स के दायरे में ला सकता है। नकद लेन-देन की तुलना में ऑनलाइन लेन-देन ट्रैक करना आसान होता है, जिससे ये विक्रेता कर अधिकारियों की नजर में आ रहे हैं।

सोशल मीडिया का मजाकिया पक्ष
इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। एक यूजर ने लिखा, "अब पानीपुरी से GST वसूलने का वक्त आ गया है!" जबकि दूसरे ने कहा, "शायद करियर बदलने का सही समय है।" हालांकि, मजाक और हल्के-फुल्के अंदाज के बीच यह मामला गंभीर सवाल उठाता है कि डिजिटल भुगतान का बढ़ता चलन छोटे विक्रेताओं के लिए टैक्स नियमों को कैसे बदल सकता है।

 

 

Source : Agency

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