सुंदरजा आम की विशेषता है कि इसे मधुमेह के मरीज भी खा सकते, मौसम के फेर में लेकिन इस बार नहीं मिल रहे खरीदार

रीवा
देश-विदेश में अपनी महक और स्वाद से लोगों को दीवाना बनाने वाला सुंदरजा आम इस बार खुद मौसम के फेर में उलझ गया है। कम उत्पादन और थोड़े-थोड़े अंतराल में वर्षा के क्रम ने आम के बगीचे वालों को चिंता में डाल दिया है। बीते वर्ष तक जनवरी या फरवरी के बीच आम के बगीचे व्यापारी बोली लगाकर खरीद लेते थे। इस बार अप्रैल के पांच दिन निकल जाने के बावजूद बगीचों के संचालक व्यापारियों की राह तक रहे हैं। यही कारण है कुठलिया आम बगीचे की नीलामी महज 12 लाख 12 हजार रुपये तक होने की उम्मीद है। गोविंदगढ़ बगीचे की नीलामी तकरीबन 32 लाख रुपये में की जा चुकी है।

किसान रामबहोर तिवारी ने बताया कि इस बार उनके बगीचे के आम के खरीदार नहीं आए हैं। पिछले वर्षों तक फरवरी माह में ही व्यापारी आकर उन्हें रुपये दे देते थे और पूरा बगीचा ले लेते थे। इस बार वर्षा अंतराल होने के कारण वैसे ही बौर आमों पर कम आए हैं। उस पर भी मौसम खराब होने से स्थिति बिगड़ गई है।

बिना रेशे वाला आम मधुमेह रोगी को भी प्रिय
सुंदरजा आम की विशेषता है कि यह बिना रेशों वाला होता है और इसे मधुमेह के मरीज भी खा सकते हैं। यह आम पकने के बाद भी 15 दिन तक रखा जा सकता है। दुनिया में रीवा सफेद बाघ के साथ ही फलों के राजा आम 'सुंदरजा' के लिए भी विख्यात है। इस आम की देश-विदेश में खासी मांग है। बीते वर्ष सुंदरजा आम की करीब 19 टन पैदावार हुई थी, लेकिन इस साल 12 टन तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

गोविंदगढ़ में होता है उत्पादन
पहले सुंदरजा आम केवल गोविंदगढ़ किले के बगीचों में होता था, लेकिन अब कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में भी इसकी खेती की जा रही है। इस आम को जीआइ टैग भी प्राप्त है। गोविंदगढ़ का सुंदरजा आम हल्का सफेद रंग का होता है, जबकि कुठुलिया फल अनुसंधान केंद्र में हल्का हरा होता है।

सुंदरजा आम ऐसे बना खास
गोविंदगढ़ की मिट्टी में उगने वाले पेड़ों के आम का स्वाद लाजवाब है।
महक इतनी जबरदस्त है कि आंख बंद करके भी पहचान सकते हैं।
1968 में सुंदरजा आम के नाम पर डाक टिकट जारी किया गया था।
दिल्ली, मुंबई, छत्तीसगढ़, गुजरात सहित कई शहर व राज्यों के लोग एडवांस ऑर्डर देकर मंगवाते हैं।
फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, कनाडा व अरब देशों में इसकी काफी मांग है।
सुंदरजा आम को एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया गया है।

महाराजा गुलाब सिंह ने लगवाया था बगीचा
फल एवं अनुसंधान केंद्र कुठुलिया का आम का बगीचा रीवा राज्य के तत्कालीन महाराजा गुलाब सिंह जूदेव के समय में लगवाया गया था। रियासत काल में यह राजे-राजवाड़ों की पसंद हुआ करता था। इसे बाद में कृषि विभाग को सौंप दिया गया। बगीचे में देवी-देवताओं के नाम से विष्णु भोग, हनुमान भोग, कृष्ण भोग, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के नाम से आम के पेड़ लगे हैं। कृषि वैज्ञानिक आरपी जोशी ने बताया कि 132 एकड़ में फैले फल अनुसंधान केंद्र कुठुलिया में लगभग ढाई हजार आम के पेड़ों का बगीचा है।

यहां सुंदरजा, मलिका, आम्रपाली, महमूद बहार, चौसा, स्वर्ण रेखा, प्रभा शंकर विष्णु भोग, कृष्ण भोग, गोपाल भोग, फजली, दशहरी व लंगड़ा आम के पेड़ हैं।
आम की कीमत प्रति किलो रुपये में मध्य प्रदेश - 160 से 190, महाराष्ट्र - 200 से 250,  दिल्ली - 160 से 220

 

 

Source : Agency

13 + 5 =

ANKUR PANDEY(Owner/Editor)

Email: [email protected]

Mobile: 9200444084

C.G Office Add: Khairagarh, Chhuikhadan Gandai, KHAIRAGARH, Chhattisgarh, India 491881